Optimistically blind

रावणो , दुशासनो , दुर्योधनो का हुँ समर्थक
राम, कान्हा या के अर्जुन से कोई दिक्कत नहीं हैं
क्रोध , भय , बैरी सिखाते , गुढ़ जीवन के तरीके
प्रेम से पूरे न होते , जिन्दगी के मायने सब
क्रोध ऊपर हो कवच, तो प्रेम अन्तः में पनपता
भय अगर अन्तः न हो, विलासिता लेती हैं दस्तक
बैरी !!
तो ऐसा महानुभव , अब क्या करू उसकी प्रशंसा
मित्रता हैं छोड देती , जब कठिन विकराल पथ पर
बस तभी प्रेरित हैं करती , दुश्मनी बन पथ प्रर्दशक
कर्ण ,सकुनी , कैकयी का हुँ प्रशंसक
हुँ  सर्मथक
गांधी,गौतम या के हजरत से कोई दिक्कत नहीं हैं।।
अखिलेश यादव
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